अनुराग सुजानिया का इस्तीफा : नाराजगी, प्रशासनिक दबाव या कोई अनकही कहानी? सवालों के घेरे में पुलिस व्यवस्था!

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मुरैना में जहरीली शराब से 24 मौतें, मंदसौर में जहरीली शराब कांड, सागर में फिर जहरीली शराब से मौतें और अब देवास में शराब तस्करी रोकने गए टीआई दिलीप पुरी की मौत… इन घटनाक्रमों के बीच आईपीएस अनुराग सुजानिया का इस्तीफा कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

मध्यप्रदेश पुलिस के 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया ने 2 नवंबर को सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया। खास बात यह है कि 27 अक्टूबर को उन्हें सागर पुलिस अधीक्षक के पद से हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय में एआईजी पदस्थ किया गया था। इसके महज चार दिन बाद उनका इस्तीफा सामने आया। उन्होंने इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत कारण बताए हैं। फिलहाल सरकार द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में केवल व्यक्तिगत फैसला है या इसके पीछे कोई प्रशासनिक असंतोष भी है?

पहला एंगल : क्या सागर एसपी पद से हटाए जाने की नाराजगी में छोड़ी नौकरी?

अनुराग सुजानिया सागर में लगभग छह महीने तक पुलिस अधीक्षक रहे। सागर जिले में जहरीली शराब से लोगों की मौतों के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे। इसके बाद सरकार ने उन्हें पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय भेज दिया।

क्या उन्हें लगा कि सागर की घटना के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराते हुए पद से हटाया गया? क्या वे इस फैसले से नाराज थे? क्या वे अपनी कार्यशैली के अनुसार पुलिसिंग करना चाहते थे, लेकिन उन्हें अपेक्षित स्वतंत्रता या सहयोग नहीं मिल रहा था?

क्या वे अपराध और अवैध शराब के नेटवर्क पर सख्ती से कार्रवाई करना चाहते थे, लेकिन व्यवस्था में उनकी नहीं चली? या फिर सरकार के तबादले के फैसले को उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर सेवा छोड़ने का निर्णय लिया?

ये सभी सवाल हैं, लेकिन इनके जवाब अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आए हैं।

दूसरा एंगल : जहरीली शराब के मामलों और पुलिस की जवाबदेही का सवाल

अनुराग सुजानिया के पुलिस करियर के साथ मुरैना और सागर के जहरीली शराब कांडों का उल्लेख बार-बार सामने आ रहा है।

मुरैना, जनवरी 2021: उस समय अनुराग सुजानिया मुरैना के एसपी थे। जहरीली शराब पीने से 24 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कलेक्टर और एसपी को हटाने के निर्देश दिए थे। इस मामले में पुलिस और आबकारी विभाग की निगरानी तथा अवैध शराब के कारोबार पर संरक्षण के आरोपों की जांच हुई थी।

मंदसौर में पद स्थापना से पहले ही जहरीली शराब कांड हुआ था।

मंदसौर, जुलाई 2021: जिले में जहरीली शराब से कई लोगों की मौत हुई थी। एसआईटी ने जांच में शराब को जहरीला पाया था और 11 मौतों की आशंका का उल्लेख किया था। यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि अनुराग सुजानिया की मंदसौर एसपी के रूप में पदस्थापना फरवरी 2022 में हुई थी। यानी मंदसौर का जहरीली शराब कांड उनके वहां एसपी रहते नहीं हुआ था। हालांकि बाद में उन्होंने मंदसौर की पुलिस कप्तानी संभाली।

सागर, 2026: सागर में भी जहरीली शराब से मौतों की घटना सामने आई। उस समय अनुराग सुजानिया एसपी थे। इस घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठे। विपक्ष ने भी उनकी भूमिका पर सवाल उठाए। बाद में उन्हें सागर से हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया।

अब सवाल यह है कि मुरैना और सागर की घटनाओं से क्या सबक लिया गया? क्या अवैध शराब के कारोबार के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था बनी? क्या पुलिस और आबकारी विभाग के उन अधिकारियों की जवाबदेही तय हुई, जिनके क्षेत्र में इस तरह का कारोबार चल रहा था?

क्या शराब तस्करों से किसी अधिकारी की सांठगांठ की जांच होनी चाहिए?

यह भी एक ऐसा सवाल है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आखिर अवैध शराब का कारोबार बिना नेटवर्क, सप्लाई चेन और स्थानीय स्तर पर सहयोग के कैसे चलता है?

क्या शराब तस्करों को किसी स्तर पर संरक्षण मिलता है? क्या पुलिस और आबकारी विभाग के भीतर ऐसे लोग हैं जिनकी भूमिका की जांच जरूरी है? क्या इन मामलों में वित्तीय लेन-देन और पूरे नेटवर्क की पड़ताल हुई?

अनुराग सुजानिया के शराब तस्करों से संबंध होने का कोई प्रमाणित तथ्य फिलहाल सामने नहीं है। इसलिए उन पर ऐसा आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ ठोस शिकायत या साक्ष्य हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

देवास की घटना ने फिर खड़े किए बड़े सवाल

अभी देवास जिले के खातेगांव में टीआई दिलीप पुरी की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। अवैध शराब के परिवहन को रोकने की कार्रवाई के दौरान संदिग्ध शराब से भरे ट्रक की चपेट में आने से उनकी जान चली गई। पुलिस ने इस मामले में शराब तस्करी के नेटवर्क की जांच शुरू की है और एसआईटी गठित की गई है।

एक तरफ जहरीली शराब से आम नागरिकों की जान जा रही है और दूसरी तरफ अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई करने वाले पुलिस एवं आबकारी अधिकारियों की सुरक्षा भी चुनौती बनती जा रही है।

क्या प्रदेश में शराब माफिया का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि कानून लागू कराने वाले अधिकारियों को भी अपनी जान गंवानी पड़ रही है?

क्या सिर्फ तबादले, निलंबन और मुआवजे से इस समस्या का समाधान हो जाएगा? क्या शराब के अवैध कारोबार की जड़ तक पहुंचकर उसके आर्थिक और राजनीतिक संरक्षण की जांच होगी?

इस्तीफे के बाद अनुराग सुजानिया की अगली भूमिका क्या होगी?

अनुराग सुजानिया मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। मध्यप्रदेश में मुरैना, मंदसौर, श्योपुर, सागर सहित कई जिलों में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। भोपाल पुलिस मुख्यालय में भी उनकी पदस्थापना रही है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उनके प्रशासनिक एवं सामाजिक संपर्कों का दायरा रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी सेवा छोड़ने के बाद वे क्या करेंगे?

क्या वे कोई नया व्यवसाय शुरू करेंगे? क्या किसी निजी संस्थान में सुरक्षा सलाहकार या अन्य पेशेवर भूमिका निभाएंगे? क्या वे सामाजिक अथवा सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होंगे? क्या भविष्य में राजस्थान या मध्यप्रदेश में किसी नई भूमिका में दिखाई देंगे?

फिलहाल इन संभावनाओं को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। यह भी देखना होगा कि सरकार उनका इस्तीफा स्वीकार करती है या नहीं।

सरकार से सीधे सवाल

1. मुरैना में जहरीली शराब से 24 मौतों के बाद क्या अवैध शराब के पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा गया था?
2. मंदसौर के जहरीली शराब कांड की एसआईटी जांच में सामने आए तथ्यों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई हुई?
3. सागर में जहरीली शराब से मौतों के मामले में पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही किस स्तर पर तय हुई?
4. क्या शराब तस्करी के नेटवर्क को राजनीतिक, प्रशासनिक या अन्य किसी स्तर पर संरक्षण मिलने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी?
5. अनुराग सुजानिया के सागर से हटाए जाने और चार दिन बाद इस्तीफा देने के बीच क्या कोई संबंध है?
6. क्या सुजानिया अपने इस्तीफे के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों को सार्वजनिक करेंगे?
7. देवास में टीआई दिलीप पुरी की मौत के बाद क्या सरकार शराब माफिया के पूरे नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई करेगी?

निष्कर्ष : इस्तीफा एक अधिकारी का, लेकिन सवाल पूरे सिस्टम से!

अनुराग सुजानिया का इस्तीफा उनका व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है। लेकिन उनके कार्यकाल से जुड़े मुरैना और सागर के जहरीली शराब कांड तथा मंदसौर में बाद की पदस्थापना जैसे तथ्यों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब तथ्यों के आधार पर सामने आना चाहिए।

मुरैना से मंदसौर, फिर सागर और अब देवास तक अवैध शराब के कारोबार से जुड़े घटनाक्रम प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर बहस की मांग करते हैं।

यह मामला केवल इस बात तक सीमित नहीं रहना चाहिए कि अनुराग सुजानिया ने नौकरी क्यों छोड़ी। यह भी पता चलना चाहिए कि प्रदेश में शराब माफिया का नेटवर्क किनके सहारे चलता है, उसे कौन संरक्षण देता है और उस पर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को कितनी सुरक्षा और स्वतंत्रता मिलती है।

आखिर कब तक जहरीली शराब आम लोगों की जान लेती रहेगी? कब तक शराब माफिया कानून को चुनौती देता रहेगा? और कब तक हर बड़ी घटना के बाद केवल अधिकारियों के तबादले और जांच की घोषणाएं होती रहेंगी?

अब निगाहें अनुराग सुजानिया के अगले कदम और सरकार की कार्रवाई पर रहेंगी।

— नरेन्द्र धनोतिया
संपादक, मध्य भारत मीडिया

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